Skip to main content

Posts

किताबों की दुनिया - राहुल अभुआ

 मैं बार-बार उन किताबों की ओर लौट जाना चाहता हूँ, जिन्हें मैं पढ़ चुका हूँ। अजीब है नई किताबें पास में पड़ी हैं लेकिन हाथ उन्हीं पुरानी, मुड़ी हुई जिल्दों की तरफ़ बढ़ जाता है। शायद इसलिए कि वो मुझे जानती हैं या शायद इसलिए कि उनमें मैं खुद को हर बार थोड़ा अलग पाता हूँ। हर बार वही पन्ने खोलता हूँ और हर बार कोई और शब्द मुझे रोक लेते हैं। कभी सोचता हूँ क्या ये शब्द पहले भी यहाँ थे? या तब मैं इन्हें देखने लायक समझ पर नहीं था। हर बार लगता है कि लेखक ने जो लिखा है क्या मैं सच में वही समझ रहा हूँ? कभी-कभी लगता है कि हर अर्थ को पकड़ लेना ज़रूरी नहीं। कुछ बातों को अधूरा छोड़ देना भी अपने आप में एक समझ है। लेकिन कुछ चीज़ें हैं जो छोड़ी ही नहीं जा सकतीं - किताबें और यात्राएँ… यात्राएँ बाहर की कम अपने अंदर की ज़्यादा। हर सफ़र कहीं पहुँचाने से ज़्यादा मुझे थोड़ा और बेहतर बना देता है। जैसे मैं खुद को ही पढ़ रहा हूँ, हर्फ़ दर हर्फ़.. खैर, यात्रा जारी है, मेरे अंतरिक्ष में छूट जाने तक। जहाँ शायद लिखने के लिए कुछ न बचे लेकिन महसूस करने को सब कुछ हो। 🌻

एकांत साथ है - राहुल अभुआ

अकेला नहीं हूँ मेरे संग  तुम पर लिखी कविताएँ, कुछ किताबें और मेरा एकांत है। (किताब: मैं शून्य ही सही)

कहीं नहीं जाना है - लेख

  “मैं कहीं नहीं से आया हूँ और मुझे इसके बाद कहीं नहीं जाना है” इस नीले ग्रह पर मेरा, तुम्हारा, सभी का होना एक सच्चाई है या किसी के मन की कल्पना भर, यह खोज का विषय हो सकता है लेकिन इससे पहले हम कहाँ थे या इसके बाद कहाँ होंगे अब यह सवाल excite नहीं करता। दोनों ही सूरतों में इस नीले ग्रह पर (रफ़ी साहब और उनके गीतों के अलावा) दो ही चीज़ें ऐसी हैं जो सुकून देती हैं पहली वो ‘चाँद’, जो कब, कहाँ और कितना दिखाई देगा, इसका अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है, बिलकुल इस अनंत ब्रह्मांड की तरह और दूसरी आपकी मुस्कान जो शायद सामने वाले को उसकी ज़िंदगी में चल रहे उतार-चढ़ाव को कुछ पलों के लिए भूल जाने में मदद कर सकती है, जिस तरह चाँद इस अनंत ब्रह्मांड के गहरे कालेपन में एक प्रकाश भर देता है (कुछ समय के लिए ही सही), वैसे ही चेहरे की मुस्कान भी किसी की आत्मा के खालीपन में कुछ उजाला भर सकती है। मुस्कुराइए ताकि आप इस दुनिया के रंगों में अपनी रोशनी मिला सकें। 🌻

Mountains Or Beaches?

  Beach Or Mountains? - अब ये सवाल सिर्फ एक ट्रैवल चॉइस नहीं बल्कि किसी गहरे subconscious का mirror सा लगने लगा है। कुछ वैसा ही जैसे जब कोई अचानक पूछ ले, “सुनो, तुम्हारा Headphone कहाँ है?” और तुम्हारे पास हो सिर्फ़ एक पुरानी-सी Handsfree, जिसकी तारें उलझी हैं, आवाज़ हल्की है लेकिन उसमें कुछ अधूरे गाने अब भी साथ बहते हैं।  फिर सोचता हूँ अगर Sigmund Freud होता तो कहता “ये Headphone तुम्हारी ‘ideal self’ है जिसे तुम ढूंढते हो लगातार, और Handsfree? तुम्हारा ‘compromise formation’ जहाँ तुम्हारा मन कहता है, “चलो, फिलहाल इससे काम चला लेते हैं।” लेकिन फिर, एक दिन Headphone मिल भी जाए - तो क्या वही सुकून आएगा? या फिर अगर Yuval Noah Harari की तरह सोचूँ तो ये समझ में आएगा कि इंसान की सबसे बड़ी भूल शायद ये है कि वो हमेशा किसी ‘better version’ की तलाश में रहता है और इस चक्कर में ही वो उसे जी नहीं पाता। तो क्या पहाड़ चुनना सचमुच सुकून है या समुंदर को देखने की तलब बस एक और ‘dopamine hit’?  क्या Headphone ही अंत है या Handsfree के साथ बिताए पलों में भी संगीत उतना ही सच था? लेकिन शायद अस...

अगर सब तय है तो - हिंदी कविता

  अगर सब तय है तो तय होगा तुम्हारा रोज़ मुझे यूँ छुप छुप कर देखना, तो तय होगा मेरा तुमसे कुछ भी ना कह पाना, तो तय ये भी होगा कि मैं कहूँ या तुम्हारे कहने का इंतज़ार करूँ तय होगा कि हम कहेंगे कि नहीं.. अगर सब तय है तो तय होगा कि इस खामोशी की भी अपनी ही ज़ुबाँ होगी तो तय होगा कि हमारी नज़रों की जुस्तजू शब्दों से भी आगे जाएगी तो तय ये भी होगा कि कुछ पल यूँ ही थमे रहेंगे हमारे बीच बिना कहे, बिना सुने फिर भी सब कह जाएंगे तय होगा कि कभी रात की चुप्पी में हम अपने दिल से वो कहेंगे जो लफ़्ज़ों से नहीं कह पाए तय होगा कि ये कहानी शायद पूरी न भी हो मगर अधूरी रहकर भी ख़ास बन जाएगी… - राहुल अभुआ (11-06-2025) #Poetry #mainshunyahisahi #rahulabhua #kavita #kavitaye #romance #love 

फुलपाखरू

सफर में अक्सर कुछ सवाल साथ चलने लगते हैं बिना बुलाए, बिना जवाबों की उम्मीद के। जैसे ये पहाड़, जिन पर जब कभी किसी ने पहली बार कदम रखा होगा… क्या उसे मालूम था कि गुलाबों की खुशबू का रंग लाल होता है?   हवा यहां कुछ और ही कहती है। रास्ते पथरीले हैं, लेकिन हर मोड़ पर कोई ना कोई नज़ारा आंखों में कुछ एहसास छोड़ जाता है। एक तितली या कहो, फुलपाखरू (शब्द जो हाल ही में सीखा) अचानक सामने आ जाती है, जैसे उसी के पीछे-पीछे चल रहा हो मन। वो उड़ती है तो लगता है जैसे वक़्त थम गया हो, जैसे ऊंचाई की परिभाषा बदल गई हो, और जब वो फूलपाखरु पास हो तो शब्द शांत रहते हैं मगर मन और आँखें बिल्कुल नहीं। यही तो हासिल है इन यात्राओं का, चलते रहना, महसूस करते जाना, और भीतर कहीं कुछ छोड़ते जाना। साल गुज़रेंगे, शायद सब कुछ यहीं लौट आए। और फिर किसी दिन, किसी शाम की हल्की ठंड में, फूलपाखरु के साथ की तलाश में चुपचाप कूंच कर जाना होगा… अगली किसी यात्रा के लिए। 🌻  -( लिखी जा रही कहानी का हिस्सा )- 

Luz y Sombra – The Art of Contrast in Filmmaking 🎬

Luz y Sombra – The Art of Contrast in Filmmaking 🎬 Cinema thrives on contrasts—light and shadow, hope and despair, chaos and silence. As filmmakers and screenwriters, we sculpt stories in this duality, knowing that brilliance shines brightest against darkness. A well-lit scene may capture beauty, but a well-crafted shadow reveals depth. Just like in life, our narratives find meaning in the spaces between light and dark. What’s your favorite example of contrast in cinema? #filmmaking #director #cinema #films #rahulabhua #screenwriter #writer #filmmaker #art #lights #mainshunyahisahi #actor #creative   

Safar Mein Kahin #Filmmaking

  सफर में कहीं.. 🌻🎬 #filmmaking #mainshunyahisahi  #Rahulabhua

कहानी में तुम - राहुल अभुआ

कुछ कहानियाँ जब सिर्फ़ कहानियाँ होती हैं, तो और भी ख़ूबसूरत लगती हैं। कहानी में तुम्हें कंगन-बालियाँ पहना सकता हूँ, कहानी में तुमसे घंटों बतिया सकता हूँ। अगर उसमें खो भी जाऊँ, तो लिख सकता हूँ कैसे, कहाँ, तुम मुझे फिर से पा सकती हो। कम से कम कहानी में तो तुम बिना झिझक मुझे देख सकोगी, मुझसे कह सकोगी… कुछ और कहो। और हाँ, जब एक कहानी दूसरी से कहे— “मुझे भी एक कहानी सुनाओ,” तो वो दोनों मिलकर एक नई कहानी बुन रही होती हैं। ज़िन्दगी 23 का पहाड़ा नहीं, TWO की TABLE है जो गुणा होगी तो EVEN ही बनायेगी, ODD नहीं.. (अगली किताब का हिस्सा) 🌻 #kahani #rahulabhua #rahul #abhua #mainshunyahisahi #poetry #hindi 

Jacket - Poetry | Rahul Abhua

They once wore my jacket with pride, Now another cloak they choose to abide. A jacket emerges when winters descend, But winters change, and seasons blend. With time, as winters shift their guise, The jacket, too, must bid goodbyes. - Rahul Abhua (Book: Main Shunya Hi Sahi)

सुनो, वो लड़की है किधर - राहुल अभुआ

सुनो, वो लड़की है किधर? जो शराब के प्याले चियर्स कर रातों को देश बचाने जाती थी फिर नशा उतरते ही ख़ुद को ख़ाली बंजर जो पाती थी जो झूठ ओढ़ हर मैल लिए Women power चिल्लाती थी जो एक जगह से दूजी जगह बस मन बहलाने जाती थी जो छल्ले बना, कई बाहों में Freedom का गाना गाती थी जो हाथ जोड़ और नाक रगड़ तुम्हे अपना बनाना चाहती थी  फिर यार नए संग अपनी हर पहचान मिटाना चाहती थी जो कहकर ख़ुद को आज़ाद रूह हर जिस्म को पाना चाहती थी अपने दिल का सब ख़ालीपन Insta पे छुपाना चाहती थी वो है कहाँ अब खोजो तो निर्भया, साक्षी और कइयों को जो न्याय दिलवा दिया हो तो अमाँ, अब कोई उसको पूछो तो हाँ वो, ख़ाली कुर्सी, सुनसान सड़क अब ढूँढों उसे वो गई किधर है कहाँ अभी वो शाम सहर सुनो, वो लड़की अब है किधर? - राहुल अभुआ | (किताब: मैं शून्य ही सही)

माथे का चुम्बन - हिंदी कविता - राहुल अभुआ

  रात की चाहत होती है माथे का चुम्बन जो हल्की आंच की तरह जलते बदन का सहारा हो सारी रात, उजले दिन को चाहिए होती है छुहन हाथों की जैसे पानी पर लिखावट की तासीर खो जाती है वैसे ही खो जाते हैं उजले दिन, महकती शामें और सर्द रातें जो नहीं खोते वो हैं - माथे का चुम्बन, हाथों की गर्म छुहन और रातों को जागकर देखे सितारे  - राहुल अभुआ #romance #love #poetry #mainshunyahisahi #rahulabhua #kavitaye 

मज़हब नहीं सिखाता रंगों में बैर करना - राहुल अभुआ

 ऐ रंगों को धर्मों में बाँटने वालो है कुछ सवाल मेरे जवाब तो दे दो हरा हो या गेरुआ जो भेद तुमने किया गर बपौती थी तुम्हारी  तो हरा उनको क्यों दिया? और दे भी दिया तो पूरा छीन लो करो रंग सारे अपने  झूमरू बन घूम लो ये बात कब तुम्हारी छोटी समझ में आएगी मज़हब नहीं सिखाता कम से कम रंगों में बैर करना - राहुल अभुआ - #humanity #poetry #prose #india #bharat #nationfirst #communal 

ना-क़ाबिले-बर्दाश्त को बर्दाश्त क्यूँ करें - राहुल अभुआ

ना-क़ाबिल-ए-बर्दाश्त को बर्दाश्त क्यूँ करें अब हमने सोच लिया तुमको माफ़ क्यूँ करें तुम वो हो जो हर साल में यार बदलते हो सरकारी कुर्सी का इस्तेमाल हम क्यूँ करें जिस घर में डेरा हो कई मुसाफ़िरों का उस उजाड़ घर में कारोबार हम क्यूँ करें - राहुल अभुआ (किताब: मैं शून्य ही सही) #shayari #sher #poetry #mainshunyahisahi #loyalty #cheating #opportunists #pseudowoke #kavita #rahulabhua  - राहुल अभुआ (किताब: मैं शून्य ही सही) #shayari #sher #mainshunyahisahi #loyalty #opportunists #cheating #poetry #rahulabhua

वो मुहब्बत की दुकान है

वो मुहब्बत की दुकान है, वो दुकान जहां कोई फकीर झोला उठाए आए तो खाली हो कर जाता है - राहुल अभुआ -  #loyalty #opportunist #pseudo #woke #cheating #mainshunyahisahi #romance 

वो शरीफ हसीना बिक जाया करती थी - राहुल अभुआ

हमने सपने साथ देखे थे मिलकर कभी चाहता तो ज़िंदगी साथ गुज़र सकती थी उसमे ख़ामी ये थी कोई मिले चंद बातें कर ले वो शरीफ़ हसीना बिक जाया करती थी - राहुल अभुआ - #shayari #kavita #opportunist #cheating #loyalty #quotes #mainshunyahisahi 

अगर तुम ज़ुल्फों को हाथ लगाती रहोगी - राहुल अभुआ

अगर तुम ज़ुल्फों को हाथ लगाती रहोगी तो मैं बातें भूलता जाऊंगा। - राहुल अभुआ - #romance #romantic #poetry #love #couple #muhabbat #quotes #talks #rahulabhua #mainshunyahisahi 

खुदा साथ रहा मेरे - राहुल अभुआ

खुदा साथ रहा मेरे जो उसने ना सुना मेरी दुआ को तू मेरा हो गया होता तो मैं उम्र भर कोसता खुदा को - राहुल अभुआ - (किताब: मैं शून्य ही सही) #poetry #shayari #loyalty #quotes #hindikavita #mainshunyahisahi #love 

आसमान की ऊंचाई - राहुल अभुआ

जिन्हें परवरिश अच्छी मिली उन्होंने आसमान चूमा बाक़ी सभी ने आज़ादी के मायने कुछ और समझे। – राहुल अभुआ – #Aazadi #jaihind #vineshphogat #Olympics #parisolympics2024