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कहीं नहीं जाना है - लेख

  “मैं कहीं नहीं से आया हूँ और मुझे इसके बाद कहीं नहीं जाना है” इस नीले ग्रह पर मेरा, तुम्हारा, सभी का होना एक सच्चाई है या किसी के मन की कल्पना भर, यह खोज का विषय हो सकता है लेकिन इससे पहले हम कहाँ थे या इसके बाद कहाँ होंगे अब यह सवाल excite नहीं करता। दोनों ही सूरतों में इस नीले ग्रह पर (रफ़ी साहब और उनके गीतों के अलावा) दो ही चीज़ें ऐसी हैं जो सुकून देती हैं पहली वो ‘चाँद’, जो कब, कहाँ और कितना दिखाई देगा, इसका अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है, बिलकुल इस अनंत ब्रह्मांड की तरह और दूसरी आपकी मुस्कान जो शायद सामने वाले को उसकी ज़िंदगी में चल रहे उतार-चढ़ाव को कुछ पलों के लिए भूल जाने में मदद कर सकती है, जिस तरह चाँद इस अनंत ब्रह्मांड के गहरे कालेपन में एक प्रकाश भर देता है (कुछ समय के लिए ही सही), वैसे ही चेहरे की मुस्कान भी किसी की आत्मा के खालीपन में कुछ उजाला भर सकती है। मुस्कुराइए ताकि आप इस दुनिया के रंगों में अपनी रोशनी मिला सकें। 🌻

Safar Mein Kahin #Filmmaking

  सफर में कहीं.. 🌻🎬 #filmmaking #mainshunyahisahi  #Rahulabhua

कहानियां और मैं - राहुल अभुआ

कहानियां गढ़ी जाने से मुझे अक्सर कोफ्त रही है, कहानियां बुनिए, बनाइये, उन्हें जीइये..जब जीने लगेंगे तो उन्हें गढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, कहना सीख जायेंगे..और कहना भी खुदसे सीखिए, खुद से कही गई कहानियों को दुनिया सुनना चाहती है। 🌻 - राहुल अभुआ   (किताब - मैं शून्य ही सही) #MainShunyaHiSahi #PoetryCollection #book #poetrybook #RahulAbhua

तस्वीरें - राहुल अभुआ

मुझे ढलते सूरज को समंदर की लहरों में प्रवाहित होते देखना इतना खूबसूरत लगता है की मैं घंटों शाम के इस लम्हे के इंतज़ार में सुकून से बैठ सकता हूं, यूँ तो तस्वीरें लेने का शौक नहीं पर जब इसके पास नहीं होता तो ये क़ैद किए लम्हे ही जीवन की भागदौड़ में ठहर जाने का सुखद आभास करवाते हैं.. #RahulAbhua #MainShunyaHiSahi