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तुम्हारा इतवार ना बन सका - राहुल अभुआ


हम दोनों में फर्क बस इतना था - 
मैं तुम्हारा 'इतवार' ना बन सका
तुम थी जो मेरा 'सोमवार' बनी रहीं
- राहुल अभुआ | (किताब - मैं शून्य ही सही)


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एकांत साथ है - राहुल अभुआ

अकेला नहीं हूँ मेरे संग  तुम पर लिखी कविताएँ, कुछ किताबें और मेरा एकांत है। (किताब: मैं शून्य ही सही)

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