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अंगूठी और सिगरेट - राहुल अभुआ

मैं ने जिन उंगलियों में
फूलों की अंगूठी पहनाई थी
तुमने अब उनमें सिगरेट लगा ली
अंगूठी की जगह अब सिगरेट ने ले ली
कईयों की सिगरेट ने,
वो भी ठीक था 
पर दिक्कत तब हुई
जब तुमने उसको 'आज़ादी' कहा।

– राहुल अभुआ –
(किताब - मैं शून्य ही सही)


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