Skip to main content

तुम तो मत बिको - लेख

पॉलिटिकल पार्टियों में इतना पलायन इधर से उधर हो रहा है, ये बिल्कुल ऐसा है जैसे कोई मौका-परस्त सरकारी 'प्रेमिका' जिसने शुरुवात में अपना 'हाथ काट' कर, 'नाक रगड़' कर आपसे रिश्ते में बने रहने के लिए रिलेशनशिप की भीख मांगी था, जिसके लिए तब 'अय्याशी' एक बुरी चीज हुआ करती थी आज समय ख़राब होने पर वो उस 'प्रेमी' को छोड़कर दूसरे पाले में घूम रही है क्योंकि सत्ता कुछ सालों तक उस पाले में रहने वाली है। 
ऐसा इस 'प्रेमिका' ने पिछले सभी 'प्रेमियों' के साथ किया और तब के प्रेमी और अब के प्रेमी सभी जानते हैं कि ये प्रेमिका कितनी 'महान' है लेकिन फिर भी इसे स्वीकार कर रहे हैं, इसकी पीछे की वजह 'शारीरिक' हो सकती है।

यहां कौन गलत कौन सही ये तो उनकी अपनी 'FREEDOM' है
सवाल यहां सिर्फ उन 'प्रेमियों' से हैं यानी 'जनता' से है, जो मौका-परस्त 'प्रेमिका' यानी 'नेता' आज इधर के और कल उधर के हैं, जिनके लिए सही या गलत उनकी सहूलियत के हिसाब से है तो समय है अब तुम 'प्रेमियों' यानी 'जनता' को जागने का। 

'रक्कासाओं' के पैरों में घुंघरू मत बांधो, इन्हे कोठे बदलने हैं पर तुम मत बिको। 

– आपका अपना देश।

#India 

Comments

Popular posts from this blog

कहीं नहीं जाना है - लेख

  “मैं कहीं नहीं से आया हूँ और मुझे इसके बाद कहीं नहीं जाना है” इस नीले ग्रह पर मेरा, तुम्हारा, सभी का होना एक सच्चाई है या किसी के मन की कल्पना भर, यह खोज का विषय हो सकता है लेकिन इससे पहले हम कहाँ थे या इसके बाद कहाँ होंगे अब यह सवाल excite नहीं करता। दोनों ही सूरतों में इस नीले ग्रह पर (रफ़ी साहब और उनके गीतों के अलावा) दो ही चीज़ें ऐसी हैं जो सुकून देती हैं पहली वो ‘चाँद’, जो कब, कहाँ और कितना दिखाई देगा, इसका अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है, बिलकुल इस अनंत ब्रह्मांड की तरह और दूसरी आपकी मुस्कान जो शायद सामने वाले को उसकी ज़िंदगी में चल रहे उतार-चढ़ाव को कुछ पलों के लिए भूल जाने में मदद कर सकती है, जिस तरह चाँद इस अनंत ब्रह्मांड के गहरे कालेपन में एक प्रकाश भर देता है (कुछ समय के लिए ही सही), वैसे ही चेहरे की मुस्कान भी किसी की आत्मा के खालीपन में कुछ उजाला भर सकती है। मुस्कुराइए ताकि आप इस दुनिया के रंगों में अपनी रोशनी मिला सकें। 🌻

एकांत साथ है - राहुल अभुआ

अकेला नहीं हूँ मेरे संग  तुम पर लिखी कविताएँ, कुछ किताबें और मेरा एकांत है। (किताब: मैं शून्य ही सही)

अगर सब तय है तो - हिंदी कविता

  अगर सब तय है तो तय होगा तुम्हारा रोज़ मुझे यूँ छुप छुप कर देखना, तो तय होगा मेरा तुमसे कुछ भी ना कह पाना, तो तय ये भी होगा कि मैं कहूँ या तुम्हारे कहने का इंतज़ार करूँ तय होगा कि हम कहेंगे कि नहीं.. अगर सब तय है तो तय होगा कि इस खामोशी की भी अपनी ही ज़ुबाँ होगी तो तय होगा कि हमारी नज़रों की जुस्तजू शब्दों से भी आगे जाएगी तो तय ये भी होगा कि कुछ पल यूँ ही थमे रहेंगे हमारे बीच बिना कहे, बिना सुने फिर भी सब कह जाएंगे तय होगा कि कभी रात की चुप्पी में हम अपने दिल से वो कहेंगे जो लफ़्ज़ों से नहीं कह पाए तय होगा कि ये कहानी शायद पूरी न भी हो मगर अधूरी रहकर भी ख़ास बन जाएगी… - राहुल अभुआ (11-06-2025) #Poetry #mainshunyahisahi #rahulabhua #kavita #kavitaye #romance #love