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तुम्हारे नाम सखी - लेख


'प्रिया ने मुझे बहुत झेला है..सब कुछ उसके नाम.." - पियूष मिश्रा सर ने अपनी प्रिया के लिए इस caption के साथ में ये बेइंतेहा खूबसूरत वीडियो पोस्ट किया है।

क्या ऐसे साथी होते हैं? अब? जो तब साथ हो जब हर परिस्तिथि आपको प्यार के खिलाफ कर रही हो, जब आपकी अना से ज़्यादा प्यार, प्यार और सिर्फ सही प्यार की value ज़्यादा हो, जब दिखावा नहीं साथ ज़रूरी हो, जब दिखावटी दोस्तों और कंधो की केयर में दिमाग, जिस्म और दिल न बदले, जब उतार-चढ़ाव से घबराकर भागने की बजाये आप अपने प्रेमी संग डट कर खड़े हो,
सब दिन एक जैसे चाहिए (बिना उतार–चढ़ाव वाले) तो प्रेम नहीं कुछ और कीजिए जिसमें 'मुनाफा' बना रहे।

क्या ऐसे साथी होते हैं? अब? होते होंगे..अब तो ज़माना Red Flag , Green Flag, toxicity, woke-culture का है (सभी के लिए नहीं सिर्फ उनके लिए जो इसे अपनी सहूलियत के हिसाब से (एक के बाद दूसरे पार्टनर के खिलाफ) सिर्फ इसलिए इस्तेमाल करते हैं ताकि कहीं से किसी नई ओर जाना हो)

जबतक पार्टी में आपके हाथ में मदिरा का ग्लास ना हो (मैं ये साफ कर दूं की मैं आपसे पूरी तरह इत्तेफ़ाक रखता हूं की शराब पीना, गुटका खाना बिल्कुल गलत नहीं) और आप सखियों और सखाओं को अपने मशहूर और डिमांड में होने पर गुरुर करते हुए ऊपर लिखे शब्दों का इस्तेमाल करके ये ना जता दें की आप कितने modern - KOOL (so - called) और available हैं तो आप उन चहीते दोस्तों को निचले दर्जे के लगेंगे, फिर चाहे अतीत में आपने खुद उस रिश्ते की शुरुवात में सामने वाले का भरोसा जीतने के लिए तमाम झूठ क्यू ना गढ़े हो, तब ज़रूरत थी अब ज़रूरत कुछ और कोई और है।

Red Flag, Green Flag, toxicity आखिर है क्या? - 'सवाल पूछना?' वो भी उन नियमों पर जो खुद से बनाये गए और सहूलियत के हिसाब से खुद से ही बदल दिए गए? वो सवाल पूछना? या फिर झूठ पकडे जाने पर offend होकर बातों से भागना? और कुछ और ना सूझने पर एक-तरफ़ा बाते गढ़ना जिसके बाद आपके कंधे आपको बताएं कि अब एक नये साथी को ढूंढो? 

बेचारगी दिखा कर मेडिकल terms सिर्फ इसलिए इस्तेमाल करना क्योंकि आप सच से offend हो रहे हैं, काम को गाली देना क्योंकि अभी आप फिर से कई नावों पर सवार हैं, पैसे को सर्वोपरि रखना, हवस का नशा छिपाने के लिए बेचारगी और प्रताड़ित होने की भूमिका बांधना – फिर ये सब क्या होता है? इस सबके लिए कोई Flag का रंग decided है या होना बाक़ी है? 

इन सब बाधाओं में डट कर साथ खड़े रहना और उतार - चढ़ाव को पार कर लेना ही जीवन है - ये कहानी सोनाली की है...अगली किताब लिख रहा हूँ 'Sonali Vs State', उतार-चढ़ावो में आसिफ सोनाली का एक साथ होना प्रेम दर्शाता है (जबकि सोनाली एक Post-op trans है - मनुष्य है)। 
यहां से वहां भाग जाना और निरंतर भागते रहना जीवन नहीं। सरकारी कुर्सी भी एक दिन बदल दी जाती है ('पंचायत' में तो चक्के वाली कुर्सी बदल दी गई थी)

ख़ैर, उस खूबसूरत पोस्ट पर आते हैं जो पियूष जी ने की, जो लोग पियूष जी के बारे में थोड़ी भी मालूमात रखते हैं वो समझेंगे की प्रिया ने पियूष को सहेज कर रखने में क्या भूमिका निभाई है। 

– राहुल अभुआ

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