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मैं जवानी में मरना चाहता हूँ - राहुल अभुआ 'ज़फर' | हिंदी कविता | मैं शून्य ही सही


मैं जवानी में मरना चाहता हूँ  

जवानी में मरना खूबसूरत होता होगा

मैं जवानी में मरना चाहता हूँ 

लम्बी उम्र और चंद सपनो का क्या फायदा, जब मिलना हमे इस मिट्टी में ही है,

मैं इस मिट्टी में मिलना चाहता हूँ 

जवानी में मरना खूबसूरत होता होगा 

मैं जवानी में मरना चाहता हूँ


इश्क़ में रोमियो होना तुम्हे मंज़ूर होगा, 

वीर भगत सिंह जैसा इश्क़ मैं करना चाहता हूँ 

जवानी में मरना खूबसूरत होता होगा 

मैं जवानी में मरना चाहता हूँ


जी ली है ज़िन्दगी मैंने अपने हिस्से की, अब कोई और चाहत नहीं इससे 

शून्य से लेखक, अभिनेता, निर्देशक सब हो चुका, अब फिर से शून्य होना चाहता हूँ 

जवानी में मरना खूबसूरत होता होगा,

मैं जवानी में मरना चाहता हूँ


हुस्न का साथ जवानी तक, जवानी का साथ कुछ सालो तक, और फिर बुढ़ापा 

शायद ये ही..शायद ये ही वो बुढ़ापा है जिससे मैं भागना चाहता हूँ 

जवानी में मरना खूबसूरत होता होगा 

मैं जवानी में मरना चाहता हूँ


बहुत भागा हूँ अपनी जिम्मेदारियों से 

पिता के सपने, माँ की इच्छाओं और दोस्तों के प्यार से 

मैं तुम सबको एक आखिरी बार निराश करना चाहता हूँ,

जवानी में मरना खूबसूरत होता होगा,

मैं जवानी में मरना चाहता हूँ

- राहुल अभुआ 'ज़फर'


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