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सहयात्री - राहुल अभुआ | हिंदी कविता


अच्छे बुरे उतार चढ़ाव के बाद
ज़िन्दगी में एक ऐसा पड़ाव ज़रूर आता है
जब बारिश की इक बूँद का 
हथेली से छूना
सिर्फ छूना नहीं बल्कि
एक आभास होता है 
बाकि बची यात्रा में 
सहयात्री के मिल जाने का
- राहुल अभुआ 'ज़फर' 🌻

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