Skip to main content

मैं मेरी योनि नहीं मेरा मन हूँ मैं - राहुल अभुआ



कविता - योनि

लो मेरी योनि ले लो,
शायद तब तुम मुझको समझ पाओ 
उस 2 मिनट की उत्तेजना के बाद
शायद समझो 
की ये बस एक मांस का टुकड़ा मात्र है
जो हम स्त्रियों में 
उस बनाने वाले ने किसी वजह से बनाया, 
लेकिन मैं मेरी योनि नहीं
मेरा मन हूँ मैं
समझो मुझे,
परे रख कर वो सारी हवस
समझो मुझे
की मैं मेरी योनि नहीं
मेरा मन हूँ मैं..

बस में होता तो सवाल करती 
उस ख़ुदा से -
ये छुआ-छूत क्यों भला?
देनी थी एक योनि उन कुछ पुरूषों को भी
शायद फिर बच जातीं  
वो मासूम बच्चियां, वो लड़कियां, वो स्त्रीयाँ 
जो उभरे हुए स्तनो और इक योनी
की वजह से शिकार हो गयीं हैवानियत का,
सहते मासिक पीड़ा ये लोग भी 
नज़रों से चीरे जाते हर पल 
तो शायद समझते
की मैं मेरी योनि नहीं
मेरा मन हूँ मैं..
- राहुल अभुआ 'ज़फर' ✍️ | @RahulAbhuaOfficial

YouTube Link - https://youtu.be/32G8Z8oMR6M
(All rights reserved under SWA)



Comments

Popular posts from this blog

कहीं नहीं जाना है - लेख

  “मैं कहीं नहीं से आया हूँ और मुझे इसके बाद कहीं नहीं जाना है” इस नीले ग्रह पर मेरा, तुम्हारा, सभी का होना एक सच्चाई है या किसी के मन की कल्पना भर, यह खोज का विषय हो सकता है लेकिन इससे पहले हम कहाँ थे या इसके बाद कहाँ होंगे अब यह सवाल excite नहीं करता। दोनों ही सूरतों में इस नीले ग्रह पर (रफ़ी साहब और उनके गीतों के अलावा) दो ही चीज़ें ऐसी हैं जो सुकून देती हैं पहली वो ‘चाँद’, जो कब, कहाँ और कितना दिखाई देगा, इसका अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है, बिलकुल इस अनंत ब्रह्मांड की तरह और दूसरी आपकी मुस्कान जो शायद सामने वाले को उसकी ज़िंदगी में चल रहे उतार-चढ़ाव को कुछ पलों के लिए भूल जाने में मदद कर सकती है, जिस तरह चाँद इस अनंत ब्रह्मांड के गहरे कालेपन में एक प्रकाश भर देता है (कुछ समय के लिए ही सही), वैसे ही चेहरे की मुस्कान भी किसी की आत्मा के खालीपन में कुछ उजाला भर सकती है। मुस्कुराइए ताकि आप इस दुनिया के रंगों में अपनी रोशनी मिला सकें। 🌻

कहानी में तुम - राहुल अभुआ

कुछ कहानियाँ जब सिर्फ़ कहानियाँ होती हैं, तो और भी ख़ूबसूरत लगती हैं। कहानी में तुम्हें कंगन-बालियाँ पहना सकता हूँ, कहानी में तुमसे घंटों बतिया सकता हूँ। अगर उसमें खो भी जाऊँ, तो लिख सकता हूँ कैसे, कहाँ, तुम मुझे फिर से पा सकती हो। कम से कम कहानी में तो तुम बिना झिझक मुझे देख सकोगी, मुझसे कह सकोगी… कुछ और कहो। और हाँ, जब एक कहानी दूसरी से कहे— “मुझे भी एक कहानी सुनाओ,” तो वो दोनों मिलकर एक नई कहानी बुन रही होती हैं। ज़िन्दगी 23 का पहाड़ा नहीं, TWO की TABLE है जो गुणा होगी तो EVEN ही बनायेगी, ODD नहीं.. (अगली किताब का हिस्सा) 🌻 #kahani #rahulabhua #rahul #abhua #mainshunyahisahi #poetry #hindi 

अगर सब तय है तो - हिंदी कविता

  अगर सब तय है तो तय होगा तुम्हारा रोज़ मुझे यूँ छुप छुप कर देखना, तो तय होगा मेरा तुमसे कुछ भी ना कह पाना, तो तय ये भी होगा कि मैं कहूँ या तुम्हारे कहने का इंतज़ार करूँ तय होगा कि हम कहेंगे कि नहीं.. अगर सब तय है तो तय होगा कि इस खामोशी की भी अपनी ही ज़ुबाँ होगी तो तय होगा कि हमारी नज़रों की जुस्तजू शब्दों से भी आगे जाएगी तो तय ये भी होगा कि कुछ पल यूँ ही थमे रहेंगे हमारे बीच बिना कहे, बिना सुने फिर भी सब कह जाएंगे तय होगा कि कभी रात की चुप्पी में हम अपने दिल से वो कहेंगे जो लफ़्ज़ों से नहीं कह पाए तय होगा कि ये कहानी शायद पूरी न भी हो मगर अधूरी रहकर भी ख़ास बन जाएगी… - राहुल अभुआ (11-06-2025) #Poetry #mainshunyahisahi #rahulabhua #kavita #kavitaye #romance #love