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Main Aur Wagon-R

This journey has come to an end. Me and our 1st car 💔 #15Years  Countless memories, unforgettable moments, lots of ups and downs and thousands of journeys.  Theater, college, weaving of stories, writing them and then telling to the world, seeing those stories reaching first small and then big screens - all passed through this car. Years have changed on the calendar, some stories have also changed but you and I have not changed. It is very sad to leave you like this. नयी कहानियों को कहने के लिए मैं सफ़र में हूँ लेकिन तुम्हारे साथ किया गया सफ़र जो कभी Suffer नहीं हुआ , इस जीवनकाल के अंत तक याद रहेगा.. वो किस्से और वो कहानियां  जो मेरे-तुम्हारे बीच थीं तुम्हारे साथ चली गयीं  मेरी, मेरे साथ जाएँगी..अलविदा ❤️ #WagonR #RahulAbhua #MainShunyaHiSahi 

दिलों की चाहत - राहुल अभुआ | Main Shunya Hi Sahi

मैं तुमको मिल जाऊं? मिल जाऊंगा पर इस बदन को जूतों की ही तरह बाहर छोड़कर आना मिलने मुझसे बदन की चाहत से बड़ी दिलों की चाहत है - राहुल अभुआ  (लिखी जा रही कहानी का अंश) #MainShunyaHiSahi #RahulAbhua #Poetry #HindiKavita #Kavitaye 

Different shades of a character

Different shades of a character #Robin in #Kakori 🎬 🎭 ❤️ #Actor #Filmmaker #Robin #RahulAbhua  

स्त्री - राहुल अभुआ | Hindi Quote

स्त्री योनि में जन्म लेना और स्त्री होना दो अलग बातें हैं - राहुल अभुआ | Main Shunya Hi Sahi  #Poetry #Kavitaye #hindiquotes #Shayari #MainShunyaHiSahi #Equality #womenhood #Stree 

सोच - राहुल अभुआ

मैं हमेशा मानता हूं की 'रंग दीवारों के उतरते/बदलते हैं मीनारों के नहीं' आपकी सोच आपकी ज़िंदगी बनाती है। जिन लोगों की सोच से खेलना आसान हो उन्हें कुछ भी घटिया वस्तु को नयी सोच कहकर बेचा जा सकता है और उन्हें लगने लगता है कि क्रांति जो अबतक किसी ट्रैफिक सिग्नल पर रुकी हुई थी वो अब होने को है। ये ही हमारे देश के साथ एडवरटाइजिंग एजेंसीज करतीं हैं। जहां लोग आज कार्ल मार्क्स को पढ़कर मार्क्सवादी हो जाएं, अगले दिन भीम को पढ़कर उन्हें बिना जाने समझे जय भीम के नारे लगाने लगें (वैसे भीम को पूजना नहीं पढ़ना ज़रूरी है), फिर अगले किसी दिन गांधी को पढ़कर बिना समझे कुछ दिनों के लिए गांधीवादी हो जाएं, उन लोगों की अपनी सोच बढ़ने के बजाए वो ऐसी मानसिकता पाल लेते हैं की दुनिया में सभी कुछ जो हो रहा है उस सब पर हमसे ज़्यादा किसी को समझ नहीं, अंत में ये लोग जब उस गुमान से बाहर आते हैं तो देर हो चुकी होती है। क्रांति जा चुकी होती है, बाकी दुनिया आगे बढ़ चुकी होती है और ऐसे लोगों का अतीत सिग्नल पर खड़ा इनपर हँस रहा होता है। - राहुल अभुआ | Main Shunya Hi Sahi #RahulAbhua #MainShunyaHiSahi 

सुविधा और सार्थकता - राहुल अभुआ

वो खोजे 'सुविधा' और मैं 'सार्थकता'। - राहुल अभुआ  (किताब - मैं शून्य ही सही) #mainshunyahisahi #hindi #quotes #life #rahulabhua

किताबें और साइकल - राहुल अभुआ

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